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Aaseb / आसेब

  

  • ₹260.00
  • by Ashfaq Ahmad  (Author)
  • Book: Aaseb
  • Paperback: 278 pages
  • Publisher: Gradias Publishing House
  • Language: Hindi
  • ISBN-13: 978-8199929371
  • Product Dimensions: 22 x 14 x 2 cm

'आसेब' हॉरर श्रेणी की छः अलग-अलग कहानियों का संकलन है, जिसमें विषय के हिसाब से कहानियों को क्रमवार रखा गया है और इस श्रेणी की कहानियों में दिलचस्पी रखने वालों के लिये सभी कहानियां एक अलग ज़ायका रखती हैं। यह उन पारंपरिक भूत-प्रेत की कहानियों से थोड़ी अलग हो सकती हैं, और थोड़ी अधूरी भी लग सकती हैं— लेकिन यह अपने आप में पूर्ण हैं। इनके अलग-अलग अंत आप अपने हिसाब से कुछ भी सोच कर मान सकते हैं— इसे पाठकों की समझ पर छोड़ा गया है।

संकलन की पहली कहानी 'खबीस' है जो एक शापित अमरत्व को ले कर है, जहां सदियों से जीता एक अनाम किरदार लगातार ज़िंदा रहने के साथ, जीवन के सभी रसों का सुख लेने के लिये, लोगों की उम्र और ज़िंदगी चुराने का एक अलग सा रास्ता चुनता है और उसके शिकार होते हैं वे समर्थ लोग— जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में वास करते हैं, ताकि उनके सहारे वह निर्बाध विचरण करता रह सके और कभी कोई उसके इस खेल की तह तक न पहुंच सके।

आसेब’ इस संग्रह की दूसरी कहानी है, जो एक ऐसे युवक की दास्तान है जो स्वभावतः तो भीरू था, लेकिन उस पर हमेशा ख़ुद को बहादुर दिखाने की ऐसी सनक सवार रहती थी कि वह अनजाने ही उन नकारात्मक शक्तियों को ख़ुद पर हावी हो जाने का मौका दे डालता है, जो उसकी ज़िंदगी को बुरी तरह त्रस्त कर देती हैं। उनसे पार पाने का उसे अंत में एक ही मंत्र समझ में आता है कि वह अपने सच को स्वीकारे, अपने डर का सामना करे, न कि उनसे भाग कर बचने की कोशिश करे और इस सिलसिले में वह घने जंगल के बीच बसी ऐसी भूतिया जगह का रुख़ करता है, जहां से वह कहानी शुरू हुई थी।

'डार्क टूरिज्म' इस संकलन की तीसरी कहानी है… यह दुनिया में प्रचलित होते एक नये तरह के ट्रेंड, डार्क टूरिज्म को परिभाषित करती है कि कैसे लोग उन जगहों की तरफ़ आकर्षित होते हैं, जिनके साथ कुछ बुरी घटनाएं या पैरानार्मल एक्टिविटीज से जुड़ी कहानियां प्रचारित होती हैं— और उन जगहों पर रात गुज़ार कर ऐसा कुछ एक्सपीरियेंस करना चाहते हैं। इस कहानी में लंदन में रहने वाले एशियाई दोस्तों का एक ग्रुप ऐसे ही डार्क टूरिज्म में नये लिस्ट हुए एक हांटेड प्लेस के आकर्षण में फंस कर वहां तीन दिन रहने के लिये पहुंच जाता है, लेकिन पहली रात के शुरु होते ही उन्हें यह समझ में आ जाता है कि अपने एडवेंचर के चलते वे एक ऐसी रियलिटी में फंस चुके हैं, जहां वह सब चीज़ें वास्तविक हैं, जिन्हें वे बस अफवाह या भ्रम भर समझते थे।

संकलन की चौथी कहानी ‘द लेक हाउस मिस्ट्री’ है— जब एक युवा वास्तुकार और उसकी पत्नी लूज़ेर्न के एक झील किनारे स्थित विला से गायब हो जाते हैंतो शहर इसे एक और अनसुलझी त्रासदी मानकर खारिज कर देता है, लेकिन सालों बादजमे हुए पानी से अजीबोगरीब गूँज उठने लगती है— नामों की फुसफुसाहटशीशे में चेहरेऔर एक ऐसी कहानी जो कभी खत्म नहीं होती। कुछ घर राज़ रखते हैं। कुछ झीलें आत्माओं को संजोए रखती हैं। ‘द लेक हाउस मिस्ट्री’ भी ऐसी ही कहानी है।

इस संकलन की पांचवी कहानी 'नाईट वाकर' है, जो एक ऐसी लड़की की कहानी है जो दसियों साल पहले किन्हीं शैतानों का शोषण सहते-सहते बेमौत मर गई थी, लेकिन जिसे कभी सुकून न नसीब हुआ और अब वह शरीर दर शरीर भटकती फिर रही।

'रोज़वेल मेंशन' इस संग्रह की छठी और आखिरी कहानी है— जो एक घर में मौजूद अलग रियलिटी की कहानी है। जहां रात गुज़ारने वाला भले शारीरिक रूप से अपनी दुनिया में ही रहता था, लेकिन दिमाग़ी तौर पर वह अलग रियलिटी में चला जाता था, जहां से कभी वापसी नहीं हो पाती।



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